श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 99: अर्जुनके द्वारा तीव्र गतिसे कौरव-सेनामें प्रवेश, विन्द और अनुविन्दका वध तथा अद्भुत जलाशयका निर्माण  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  7.99.41 
संजय उवाच
सोऽवतीर्य रथोपस्थादसम्भ्रान्तो धनंजय:।
गाण्डीवं धनुरादाय तस्थौ गिरिरिवाचल:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - हे राजन! अर्जुन बिना किसी घबराहट के रथ से उतर पड़े और गाण्डीव धनुष हाथ में लेकर पर्वत के समान स्थिर खड़े हो गए।
 
Sanjaya says - O King! Arjuna got down from the seat of the chariot without any nervousness and holding the Gandiva bow in his hand stood as still as a mountain.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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