श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 98: द्रोणाचार्य और सात्यकिका अद्भुत युद्ध  »  श्लोक 38-39h
 
 
श्लोक  7.98.38-39h 
ततस्त्वरन् पुनर्द्रोणो धनुर्हस्तो व्यतिष्ठत॥ ३८॥
सज्यं सज्यं धनुश्चास्य चिच्छेद निशितै: शरै:।
 
 
अनुवाद
तब द्रोणाचार्य पुनः दूसरा धनुष लेकर बड़ी शीघ्रता से उठ खड़े हुए; किन्तु ज्योंही वे धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाते, त्योंही सात्यकि अपने तीखे बाणों से उसे काट डालते।
 
Then Dronacharya again stood up in great haste with another bow in his hand; but as soon as he would string the bow, Satyaki would cut it with his sharp arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)