श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 97: द्रोणाचार्य और धृष्टद्युम्नका युद्ध तथा सात्यकिद्वारा धृष्टद्युम्नकी रक्षा  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  7.97.36 
तत: सर्वे रथास्तूर्णं पाञ्चाल्या जयगृद्धिन:।
सात्वताभिसृते द्रोणे धृष्टद्युम्नमवाक्षिपन्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
जब द्रोणाचार्य का सात्यकि से युद्ध हुआ, तब विजय के लिए उत्सुक सभी पांचाल रथी तुरन्त ही धृष्टद्युम्न को अपने रथों पर बिठाकर ले गए।
 
When Dronacharya got into a fight with Satyaki, all the Panchala charioteers, eager for victory, immediately placed Dhrishtadyumna on their chariots and took him away.
 
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि जयद्रथवधपर्वणि द्रोणधृष्टद्मुम्नयुद्धे सप्तनवतितमोऽध्याय:॥ ९७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत जयद्रथवधपर्वमें द्रोणाचार्य और धृष्टद्युम्नका युद्धविषयक सत्तानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ९७॥

 
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