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श्लोक  7.97.32 
तं चतुर्दशभिस्तीक्ष्णैर्बाणैश्चिच्छेद सात्यकि:।
ग्रस्तमाचार्यमुख्येन धृष्टद्युम्नं व्यमोचयत्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
उस समय सात्यकि ने चौदह तीखे बाण चलाकर उन बाणों को काट डाला और इस प्रकार आचार्यप्रवर के चंगुल में फंसे हुए धृष्टद्युम्न को बचा लिया।
 
At that time Satyaki shot fourteen sharp arrows and cut those arrows and thus saved Dhrishtadyumna who was trapped in the clutches of Aacharyapravara.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)