श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 97: द्रोणाचार्य और धृष्टद्युम्नका युद्ध तथा सात्यकिद्वारा धृष्टद्युम्नकी रक्षा  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  7.97.27 
खड्गेन चरतस्तस्य शोणाश्वानधितिष्ठत:।
न ददर्शान्तरं द्रोणस्तदद्भुतमिवाभवत्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
आचार्य द्रोण ने लाल घोड़े पर खड़े होकर तलवार चलाते हुए धृष्टद्युम्न पर आक्रमण करने का तनिक भी अवसर न देखा, यह अद्भुत बात थी॥ 27॥
 
Acharya Drona did not see even the slightest opportunity to attack Dhrishtadyumna while standing on the red horse and swinging his sword. That was an amazing thing.॥ 27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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