vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 97: द्रोणाचार्य और धृष्टद्युम्नका युद्ध तथा सात्यकिद्वारा धृष्टद्युम्नकी रक्षा
»
श्लोक 15
श्लोक
7.97.15
आकर्षन्त: शरीराणि शरीरावयवांस्तथा।
नराश्वगजसंघानां शिरांसि च ततस्तत:॥ १५॥
अनुवाद
मनुष्यों, घोड़ों और हाथियों के समूहों के सम्पूर्ण शरीर, अंग और सिर इधर-उधर खींचे जा रहे थे।
The entire bodies, limbs and heads of groups of men, horses and elephants were pulled here and there. 15.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×