श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 96: दोनों पक्षोंके प्रधान वीरोंका द्वन्द्व-युद्ध  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  7.96.18 
अलम्बुषस्तु संक्रुद्ध: कुन्तिभोजशरार्दित:।
अशोभत भृशं लक्ष्म्या पुष्पाढॺ इव किंशुक:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
राजा कुन्तीभोज के बाणों से आहत होकर अत्यन्त क्रोध में भरा हुआ वह राक्षस अलम्बुष पुष्पों से लदे हुए पलाश वृक्ष के समान शोभायमान होने लगा ॥18॥
 
Struck by the arrows of King Kunti Bhoja, the demon Alambusha, filled with great anger, began to look as splendid as a Palaash tree laden with flowers. ॥18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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