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mahabharat 7.95.50-51: भूरिश्रवा आदि वीर उसके पृष्ठभाग की रक्षा करते थे। कृपाचार्य, वृषसेन, शल और वीर शल्य, ये सभी बुद्धिमान, महान धनुर्धर और युद्ध में कुशल थे, और इस प्रकार सिन्धुराज की रक्षा की व्यवस्था करके वहाँ युद्ध कर रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 7.95: द्रोण और धृष्टद्युम्नका भीषण संग्राम तथा उभय पक्षके प्रमुख वीरोंका परस्पर संकुल युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 95: द्रोण और धृष्टद्युम्नका भीषण संग्राम तथा उभय पक्षके प्रमुख वीरोंका परस्पर संकुल युद्ध  »  श्लोक 50-51
 
 
श्लोक  7.95.50-51 
पृष्ठगोपास्तु तस्यासन् सौमदत्तिपुरोगमा:।
कृपश्च वृषसेनश्च शल: शल्यश्च दुर्जय:॥ ५०॥
नीतिमन्तो महेष्वासा: सर्वे युद्धविशारदा:।
सैन्धवस्य विधायैवं रक्षां युयुधिरे तत:॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
भूरिश्रवा आदि वीर उसके पृष्ठभाग की रक्षा करते थे। कृपाचार्य, वृषसेन, शल और वीर शल्य, ये सभी बुद्धिमान, महान धनुर्धर और युद्ध में कुशल थे, और इस प्रकार सिन्धुराज की रक्षा की व्यवस्था करके वहाँ युद्ध कर रहे थे।
 
Brave men like Bhurishrava etc. used to protect his rear. Kripa, Vrishasena, Shala and the brave Shalya, all of them were wise men, great archers and skilled in warfare, and thus arranging for the protection of Sindhuraj, they were fighting there. 50-51॥
 
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि जयद्रथवधपर्वणि संकुलयुद्धे पञ्चनवतितमोऽध्याय:॥ ९५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत जयद्रथवधपर्वमें संकुलयुद्धविषयक पंचानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ९५॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)