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mahabharat 7.95.40: क्रोधित दु:शासन ने अपनी भागती हुई सेना को पुनः स्थिर करके क्रोध में आकर युद्धस्थल में श्रेष्ठ रथी सात्यकि पर आक्रमण कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.95: द्रोण और धृष्टद्युम्नका भीषण संग्राम तथा उभय पक्षके प्रमुख वीरोंका परस्पर संकुल युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.95.40 
दु:शासनस्त्ववस्थाप्य स्वमनीकममर्षण:।
सात्यकिं प्रत्ययौ क्रुद्ध: शूरो रथवरं युधि॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
क्रोधित दु:शासन ने अपनी भागती हुई सेना को पुनः स्थिर करके क्रोध में आकर युद्धस्थल में श्रेष्ठ रथी सात्यकि पर आक्रमण कर दिया।
 
The resentful Dushasan, having again steadyed his fleeing army, in anger attacked Satyaki, the best of charioteers, on the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)