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श्लोक 7.95.24  |
काल: स्म ग्रसते योधान् धृष्टद्युम्नेन मोहितान्।
संग्रामे तुमुले तस्मिन्निति सम्मेनिरे जना:॥ २४॥ |
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| अनुवाद |
| उस भयंकर युद्ध में सब लोग यह मानने लगे कि स्वयं काल ही धृष्टद्युम्न के द्वारा कौरव योद्धाओं का भक्षण कर रहा है और उन्हें मोहित कर रहा है॥ 24॥ |
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| In that terrible battle everybody began to believe that it was Time himself who was devouring the Kaurava warriors through Dhrishtadyumna and enticing them.॥ 24॥ |
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