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श्लोक  7.95.20 
तथा तु यतमानस्य द्रोणस्य युधि भारत।
धृष्टद्युम्नं समासाद्य त्रिधा सैन्यमभिद्यत॥ २०॥
 
 
अनुवाद
भरत! इस प्रकार युद्ध में विजय पाने के लिए प्रयत्नशील द्रोणाचार्य की सेना धृष्टद्युम्न के पास पहुँची और तीन भागों में विभक्त हो गई।
 
Bharata! Thus striving to win the war, Dronacharya's army reached Dhrishtadyumna and got divided into three parts.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)