श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 94: दुर्योधनका उपालम्भ सुनकर द्रोणाचार्यका उसके शरीरमें दिव्य कवच बाँधकर उसीको अर्जुनके साथ युद्धके लिये भेजना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  7.94.9 
स्थिरा बुद्धिर्नरेन्द्राणामासीद् ब्रह्मविदां वर।
नातिक्रमिष्यति द्रोणं जातु जीवं धनंजय:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
हे ब्रह्मज्ञानियों में श्रेष्ठ गुरुदेव! हमारे पक्ष के राजाओं का दृढ़ विश्वास था कि द्रोणाचार्य के जीवित रहते अर्जुन उन्हें पार करके सेना में प्रवेश नहीं कर सकेगा॥9॥
 
Gurudev, the best amongst all the knowers of Brahman! The kings of our side firmly believed that Arjuna would not be able to cross Dronacharya and enter the army as long as he was alive.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)