भरत! उस समय समुद्र के समान अगाध कुरुपुत्र दुर्योधन को युद्ध के लिए आते देख आपकी सेना में बड़ा कोलाहल मच गया।
Bhaarata! At that time, seeing the son of Kuru Duryodhana, who was as deep as the ocean, setting out for the war, a great uproar broke out in your army.
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि जयद्रथवधपर्वणि दुर्योधनकवचबन्धने चतुर्नवतितमोऽध्याय:॥ ९४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत जयद्रथवधपर्वमें दुर्योधनका कवच-बन्धनविषयक चौरानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ९४॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥