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श्री महाभारत
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पर्व 7: द्रोण पर्व
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अध्याय 94: दुर्योधनका उपालम्भ सुनकर द्रोणाचार्यका उसके शरीरमें दिव्य कवच बाँधकर उसीको अर्जुनके साथ युद्धके लिये भेजना
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श्लोक 58-59h
श्लोक
7.94.58-59h
सोऽब्रवीत् स्वागतं देवा ब्रूत किं करवाण्यहम्॥ ५८॥
अमोघं दर्शनं मह्यं कामप्राप्तिरतोऽस्तु व:।
अनुवाद
उस समय भगवान शिव ने कहा, "देवताओं! आपका स्वागत है। बताइए, मैं आपके लिए क्या कर सकता हूँ? मेरी दृष्टि अमोघ है। अतः आपको अपनी मनोकामनाएँ पूर्ण हों।"
At that time Lord Shiva said, 'Gods! You are welcome. Tell me, what can I do for you? My sight is infallible. So may you achieve your desired wishes.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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