श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 94: दुर्योधनका उपालम्भ सुनकर द्रोणाचार्यका उसके शरीरमें दिव्य कवच बाँधकर उसीको अर्जुनके साथ युद्धके लिये भेजना  »  श्लोक 57-58h
 
 
श्लोक  7.94.57-58h 
ते गत्वा सहिता देवा ब्रह्मणा सह मन्दरम्॥ ५७॥
अपश्यंस्तेजसां राशिं सूर्यकोटिसमप्रभम्।
 
 
अनुवाद
तब ब्रह्माजी के साथ एकत्रित हुए समस्त देवताओं ने मंदराचल पर जाकर भगवान शिव को देखा, जिनकी कांति करोड़ों सूर्यों के समान उज्ज्वल थी॥57 1/2॥
 
Then all the gods gathered together with Brahmaji went to Mandarachal and saw Lord Shiva, whose radiance was as bright as millions of suns. 57 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)