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mahabharat 7.94.56-57h: उनके दर्शन पाकर तुम वृत्रासुर को परास्त कर सकोगे। अतः शीघ्र ही मंदराचल पर जाओ, जहाँ तपस्या के रचयिता, दक्षयज्ञ के विध्वंसक और भगदेवता के नेत्रों का नाश करने वाले पिनाकधारी भगवान शिव विराजमान हैं। 56 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.94: दुर्योधनका उपालम्भ सुनकर द्रोणाचार्यका उसके शरीरमें दिव्य कवच बाँधकर उसीको अर्जुनके साथ युद्धके लिये भेजना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 94: दुर्योधनका उपालम्भ सुनकर द्रोणाचार्यका उसके शरीरमें दिव्य कवच बाँधकर उसीको अर्जुनके साथ युद्धके लिये भेजना  »  श्लोक 56-57h
 
 
श्लोक  7.94.56-57h 
दृष्ट्वा जेष्यथ वृत्रं तं क्षिप्रं गच्छत मन्दरम्।
यत्रास्ते तपसां योनिर्दक्षयज्ञविनाशन:॥ ५६॥
पिनाकी सर्वभूतेशो भगनेत्रनिपातन:।
 
 
अनुवाद
उनके दर्शन पाकर तुम वृत्रासुर को परास्त कर सकोगे। अतः शीघ्र ही मंदराचल पर जाओ, जहाँ तपस्या के रचयिता, दक्षयज्ञ के विध्वंसक और भगदेवता के नेत्रों का नाश करने वाले पिनाकधारी भगवान शिव विराजमान हैं। 56 1/2॥
 
By getting his darshan you will be able to defeat Vritrasura. Therefore, quickly go to Mandarachal, where Lord Shiva, the creator of penance, the destroyer of Dakshayagya and the destroyer of the eyes of Bhagdevta, the pinak-wearing Lord Shiva, resides. 56 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)