श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 94: दुर्योधनका उपालम्भ सुनकर द्रोणाचार्यका उसके शरीरमें दिव्य कवच बाँधकर उसीको अर्जुनके साथ युद्धके लिये भेजना  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  7.94.55 
स तस्यैव प्रसादाद् वो हन्यादेव रिपुर्बली।
नागत्वा शंकरस्थानं भगवान् दृश्यते हर:॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
वह बलवान शत्रु भगवान शंकर की कृपा से ही निश्चय ही आप सबको मार सकता है। अतः भगवान शंकर के धाम में जाए बिना उनका दर्शन नहीं हो सकता। 55.
 
That powerful enemy can surely kill all of you only by the grace of Lord Shankar. Therefore, without going to the abode of Lord Shankar, one cannot have his Darshan. 55.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)