श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 94: दुर्योधनका उपालम्भ सुनकर द्रोणाचार्यका उसके शरीरमें दिव्य कवच बाँधकर उसीको अर्जुनके साथ युद्धके लिये भेजना  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  7.94.52 
अथ पार्श्वे स्थितं विष्णुं शक्रादींश्च सुरोत्तमान्।
प्राह तथ्यमिदं वाक्यं विषण्णान् सुरसत्तमान्॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
तब ब्रह्माजी ने अपने निकट स्थित भगवान विष्णु और शोक से भरे हुए इन्द्र आदि महान देवताओं से यह सच्ची बात कही- 52॥
 
Then Lord Brahma said this true thing to Lord Vishnu standing near him and the great gods like Indra who were filled with sadness - 52॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)