श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 94: दुर्योधनका उपालम्भ सुनकर द्रोणाचार्यका उसके शरीरमें दिव्य कवच बाँधकर उसीको अर्जुनके साथ युद्धके लिये भेजना  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  7.94.51 
देवा ऊचु:
प्रमर्दितानां वृत्रेण देवानां देवसत्तम।
गतिर्भव सुरश्रेष्ठ त्राहि नो महतो भयात्॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
देवताओं ने कहा - देवप्रवर! श्रेष्ठ! आप उन देवताओं को शरण प्रदान करें, जो वृत्रासुर द्वारा सब प्रकार से कुचले गए हैं। महान भय से हमारी रक्षा करें।
 
The gods said – Devpravara! Best! May you provide shelter to those gods who have been crushed in every way by Vritrasura. Protect us from great fear.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)