श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 94: दुर्योधनका उपालम्भ सुनकर द्रोणाचार्यका उसके शरीरमें दिव्य कवच बाँधकर उसीको अर्जुनके साथ युद्धके लिये भेजना  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  7.94.45 
असितो देवलश्चैव विश्वामित्रस्तथाङ्गिरा:।
वसिष्ठ: कश्यपश्चैव स्वस्ति कुर्वन्तु ते नृप॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
नरेश्वर! असित, देवल, विश्वामित्र, अंगिरा, वशिष्ठ और कश्यप आपका कल्याण करें। 45॥
 
Nareshwar! May Asit, Deval, Vishwamitra, Angira, Vashishtha and Kashyap do good to you. 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)