श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 94: दुर्योधनका उपालम्भ सुनकर द्रोणाचार्यका उसके शरीरमें दिव्य कवच बाँधकर उसीको अर्जुनके साथ युद्धके लिये भेजना  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  7.94.43 
स्वस्ति तेऽस्त्वेकपादेभ्यो बहुपादेभ्य एव च।
स्वस्त्यस्त्वपादकेभ्यश्च नित्यं तव महारणे॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
इस महायुद्ध में एक पैर वाले, अनेक पैर वाले और विहीन प्राणियों का तुम्हें आशीर्वाद प्राप्त हो ॥ 43॥
 
In this great war, may you be blessed with the one-legged, the many-legged and the legless beings. ॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)