श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 94: दुर्योधनका उपालम्भ सुनकर द्रोणाचार्यका उसके शरीरमें दिव्य कवच बाँधकर उसीको अर्जुनके साथ युद्धके लिये भेजना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  7.94.41 
द्रोण उवाच
करोतु स्वस्ति ते ब्रह्म ब्रह्मा चापि द्विजातय:।
सरीसृपाश्च ये श्रेष्ठास्तेभ्यस्ते स्वस्ति भारत॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
द्रोणाचार्य बोले - भरतनन्दन! परब्रह्म परमेश्वर तुम्हारा कल्याण करें। ब्रह्माजी और ब्राह्मण तुम्हारा कल्याण करें। श्रेष्ठ सर्प भी तुम्हारा कल्याण करें॥ 41॥
 
Dronacharya said - Bharatanandan! May the Supreme God bless you. May Brahmaji and Brahmins bless you. May the best snakes also bless you.॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)