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mahabharat 7.94.39-40: संजय कहते हैं - हे राजन! ऐसा कहकर वेदवेत्ताओं में श्रेष्ठ द्रोणाचार्य ने अपने ज्ञान के बल से सबको चकित करने की इच्छा से तुरन्त ही जल पी लिया और उस महायुद्ध में आपके पुत्र दुर्योधन की विजय के लिए विधिपूर्वक मन्त्र उच्चारण के साथ उस अत्यन्त तेजस्वी एवं अद्भुत कवच को उसके शरीर पर बाँध दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.94: दुर्योधनका उपालम्भ सुनकर द्रोणाचार्यका उसके शरीरमें दिव्य कवच बाँधकर उसीको अर्जुनके साथ युद्धके लिये भेजना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 94: दुर्योधनका उपालम्भ सुनकर द्रोणाचार्यका उसके शरीरमें दिव्य कवच बाँधकर उसीको अर्जुनके साथ युद्धके लिये भेजना  »  श्लोक 39-40
 
 
श्लोक  7.94.39-40 
संजय उवाच
एवमुक्त्वा त्वरन् द्रोण: स्पृष्ट्वाम्भा वर्म भास्वरम्।
आबबन्धाद्भुततमं जपन् मन्त्रं यथाविधि॥ ३९॥
रणे तस्मिन् सुमहति विजयाय सुतस्य ते।
विसिस्मापयिषुर्लोकान् विद्यया ब्रह्मवित्तम:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - हे राजन! ऐसा कहकर वेदवेत्ताओं में श्रेष्ठ द्रोणाचार्य ने अपने ज्ञान के बल से सबको चकित करने की इच्छा से तुरन्त ही जल पी लिया और उस महायुद्ध में आपके पुत्र दुर्योधन की विजय के लिए विधिपूर्वक मन्त्र उच्चारण के साथ उस अत्यन्त तेजस्वी एवं अद्भुत कवच को उसके शरीर पर बाँध दिया।
 
Sanjaya says - O King! Having said this, Dronacharya, the best amongst the scholars of the Vedas, wishing to astonish everyone with the power of his knowledge, immediately sipped water and, for the victory of your son Duryodhana in that great war, along with the proper chanting of mantras, tied that extremely brilliant and wonderful armour on the body of that person.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)