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mahabharat 7.94.38: अतः इस कवच को धारण करके तुम शीघ्र ही युद्धभूमि में जाकर क्रोधित अर्जुन का सामना करो। वह तुम्हारे वेग का सामना नहीं कर सकेगा ॥38॥   |   mahabharat अध्याय 7.94: दुर्योधनका उपालम्भ सुनकर द्रोणाचार्यका उसके शरीरमें दिव्य कवच बाँधकर उसीको अर्जुनके साथ युद्धके लिये भेजना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 94: दुर्योधनका उपालम्भ सुनकर द्रोणाचार्यका उसके शरीरमें दिव्य कवच बाँधकर उसीको अर्जुनके साथ युद्धके लिये भेजना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  7.94.38 
स त्वं कवचमास्थाय क्रुद्धमद्य रणेऽर्जुनम्।
त्वरमाण: स्वयं याहि न त्वासौ विसहिष्यति॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
अतः इस कवच को धारण करके तुम शीघ्र ही युद्धभूमि में जाकर क्रोधित अर्जुन का सामना करो। वह तुम्हारे वेग का सामना नहीं कर सकेगा ॥38॥
 
Therefore, wearing this armour, you should quickly go to the battlefield to face the enraged Arjuna. He will not be able to withstand your speed. ॥ 38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)