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mahabharat 7.94.37: इस कवच के स्थापित हो जाने पर श्रीकृष्ण, अर्जुन तथा अन्य कोई भी शस्त्रधारी योद्धा अपने बाणों से तुम्हें हानि नहीं पहुँचा सकेगा ॥37॥   |   mahabharat अध्याय 7.94: दुर्योधनका उपालम्भ सुनकर द्रोणाचार्यका उसके शरीरमें दिव्य कवच बाँधकर उसीको अर्जुनके साथ युद्धके लिये भेजना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 94: दुर्योधनका उपालम्भ सुनकर द्रोणाचार्यका उसके शरीरमें दिव्य कवच बाँधकर उसीको अर्जुनके साथ युद्धके लिये भेजना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  7.94.37 
न कृष्णो न च कौन्तेयो न चान्य: शस्त्रभृद् रणे।
शरानर्पयितुं कश्चित् कवचे तव शक्ष्यति॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
इस कवच के स्थापित हो जाने पर श्रीकृष्ण, अर्जुन तथा अन्य कोई भी शस्त्रधारी योद्धा अपने बाणों से तुम्हें हानि नहीं पहुँचा सकेगा ॥37॥
 
With this armour in place, even Sri Krishna, Arjuna and any other armed warrior will not be able to harm you with his arrows. ॥ 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)