एष ते कवचं राजंस्तथा बध्नामि काञ्चनम्।
यथा न बाणा नास्त्राणि प्रहरिष्यन्ति ते रणे॥ ३५॥
अनुवाद
हे राजन! मैं इस स्वर्ण कवच को तुम्हारे शरीर पर इस प्रकार बाँध दूँगा कि युद्धभूमि में छोड़े गए बाण आदि अस्त्र-शस्त्र तुम्हें चोट न पहुँचा सकेंगे॥35॥
O King! I will tie this golden armour to your body in such a way that the arrows and other weapons fired on the battlefield will not be able to hurt you. ॥ 35॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥