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mahabharat 7.94.35: हे राजन! मैं इस स्वर्ण कवच को तुम्हारे शरीर पर इस प्रकार बाँध दूँगा कि युद्धभूमि में छोड़े गए बाण आदि अस्त्र-शस्त्र तुम्हें चोट न पहुँचा सकेंगे॥35॥   |   mahabharat अध्याय 7.94: दुर्योधनका उपालम्भ सुनकर द्रोणाचार्यका उसके शरीरमें दिव्य कवच बाँधकर उसीको अर्जुनके साथ युद्धके लिये भेजना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 94: दुर्योधनका उपालम्भ सुनकर द्रोणाचार्यका उसके शरीरमें दिव्य कवच बाँधकर उसीको अर्जुनके साथ युद्धके लिये भेजना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  7.94.35 
एष ते कवचं राजंस्तथा बध्नामि काञ्चनम्।
यथा न बाणा नास्त्राणि प्रहरिष्यन्ति ते रणे॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! मैं इस स्वर्ण कवच को तुम्हारे शरीर पर इस प्रकार बाँध दूँगा कि युद्धभूमि में छोड़े गए बाण आदि अस्त्र-शस्त्र तुम्हें चोट न पहुँचा सकेंगे॥35॥
 
O King! I will tie this golden armour to your body in such a way that the arrows and other weapons fired on the battlefield will not be able to hurt you. ॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)