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श्री महाभारत
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पर्व 7: द्रोण पर्व
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अध्याय 94: दुर्योधनका उपालम्भ सुनकर द्रोणाचार्यका उसके शरीरमें दिव्य कवच बाँधकर उसीको अर्जुनके साथ युद्धके लिये भेजना
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श्लोक 27
श्लोक
7.94.27
दुर्योधन उवाच
कथं त्वामप्यतिक्रान्त: सर्वशस्त्रभृतां वरम्।
धनंजयो मया शक्य आचार्य प्रतिबाधितुम्॥ २७॥
अनुवाद
दुर्योधन ने कहा, "आचार्य! आप समस्त शस्त्रधारियों में श्रेष्ठ हैं। जो अर्जुन आपको भी लांघकर आगे बढ़ गया है, उसे मैं कैसे रोक सकता हूँ?"
Duryodhan said, "Aacharya! You are the best among all the weapon holders. How can I stop Arjuna who has crossed even you and moved ahead?"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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