श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 94: दुर्योधनका उपालम्भ सुनकर द्रोणाचार्यका उसके शरीरमें दिव्य कवच बाँधकर उसीको अर्जुनके साथ युद्धके लिये भेजना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  7.94.25 
तुल्याभिजनकर्माणं शत्रुमेकं सहायवान्।
गत्वा योधय मा भैस्त्वं त्वं ह्यस्य जगत: पति:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
तुम्हारा शत्रु अर्जुन भी तुम्हारे ही वंश और पराक्रम वाला है। इस समय वह अकेला है और तुम उसके अनेक सहायक हो। (उसने अपना राज्य खो दिया है और तुम) इस सम्पूर्ण जगत के स्वामी हो। अतः तुम डरो मत। जाओ और अर्जुन से युद्ध करो॥ 25॥
 
Your enemy Arjuna is also of the same lineage and prowess as you. At this moment he is alone and you are full of helpers. (He has lost his kingdom and you) are the master of this entire world. So do not be afraid. Go and fight with Arjuna.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)