श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 94: दुर्योधनका उपालम्भ सुनकर द्रोणाचार्यका उसके शरीरमें दिव्य कवच बाँधकर उसीको अर्जुनके साथ युद्धके लिये भेजना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  7.94.24 
धनंजयेन चोत्सृष्टो वर्तते प्रमुखे नृप।
तस्माद् व्यूहमुखं हित्वा नाहं योत्स्यामि फाल्गुनम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
हे पुरुषों! इस समय युधिष्ठिर मेरे सामने अर्जुन के बिना खड़े हैं। ऐसी स्थिति में मैं सेना का द्वार छोड़कर अर्जुन से युद्ध करने नहीं जाऊँगा॥ 24॥
 
O lord of men! At this moment Yudhishthira is standing in front of me without Arjuna. In such a condition I will not leave the gate of the formation and go to fight with Arjuna.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)