स तथा कुरु शोणाश्व यथा मुच्येत सैन्धव:।
मम चार्तप्रलापानां मा क्रुध: पाहि सैन्धवम्॥ १८॥
अनुवाद
लाल घोड़ों वाले आचार्य! कृपया कुछ ऐसा कीजिए जिससे सिंधुराज जयद्रथ मृत्यु से बच जाए। मेरे दुःख के कारण मैंने जो प्रलाप किया है, उस पर आप क्रोधित न हों; यथासम्भव सिंधुराज की रक्षा कीजिए।॥18॥
‘Aacharya of the red horses! Please do something so that Sindhuraj Jayadratha can escape death. Please do not be angry at the ravings I have made due to my distress; protect Sindhuraj in whatever way possible.'॥ 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥