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mahabharat 7.94.16: मुझ मूर्ख ने यह मानकर कि मुझे आपसे सुरक्षा मिलेगी, सिंधुराज जयद्रथ को बहला-फुसलाकर यहीं रोक लिया और इस प्रकार मोहवश उसे मृत्यु के हवाले कर दिया॥16॥   |   mahabharat अध्याय 7.94: दुर्योधनका उपालम्भ सुनकर द्रोणाचार्यका उसके शरीरमें दिव्य कवच बाँधकर उसीको अर्जुनके साथ युद्धके लिये भेजना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 94: दुर्योधनका उपालम्भ सुनकर द्रोणाचार्यका उसके शरीरमें दिव्य कवच बाँधकर उसीको अर्जुनके साथ युद्धके लिये भेजना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  7.94.16 
मया त्वाशंसमानेन त्वत्तस्त्राणमबुद्धिना।
आश्वासित: सिन्धुपतिर्मोहाद् दत्तश्च मृत्यवे॥ १६॥
 
 
अनुवाद
मुझ मूर्ख ने यह मानकर कि मुझे आपसे सुरक्षा मिलेगी, सिंधुराज जयद्रथ को बहला-फुसलाकर यहीं रोक लिया और इस प्रकार मोहवश उसे मृत्यु के हवाले कर दिया॥16॥
 
I, the fool, believing that I would get protection from you, persuaded and stopped Sindhuraj Jayadratha here and thus, out of attachment, I handed him over to death.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)