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श्री महाभारत
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पर्व 7: द्रोण पर्व
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अध्याय 94: दुर्योधनका उपालम्भ सुनकर द्रोणाचार्यका उसके शरीरमें दिव्य कवच बाँधकर उसीको अर्जुनके साथ युद्धके लिये भेजना
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श्लोक 15
श्लोक
7.94.15
नादास्यच्चेद् वरं मह्यं भवान् पाण्डवनिग्रहे।
नावारयिष्यं गच्छन्तमहं सिन्धुपतिं गृहान्॥ १५॥
अनुवाद
यदि आपने मुझे अर्जुन को रोकने का वरदान न दिया होता, तो मैं सिन्धुराज जयद्रथ को उसके घर जाते समय कभी न रोक पाता॥15॥
Had you not given me the boon to stop Arjun, I would never have stopped Sindhuraj Jayadratha when he was going to his home.॥ 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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