Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.94.12: हे ब्राह्मण! मैं अपनी शक्ति के अनुसार तुम्हारे लिए उत्तम जीविका का प्रबन्ध करता रहता हूँ और तुम्हें प्रसन्न रखने का प्रयत्न करता रहता हूँ; परन्तु तुम्हें ये सब बातें स्मरण नहीं रहतीं॥ 12॥ | mahabharat अध्याय 7.94: दुर्योधनका उपालम्भ सुनकर द्रोणाचार्यका उसके शरीरमें दिव्य कवच बाँधकर उसीको अर्जुनके साथ युद्धके लिये भेजना । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यथाशक्ति च ते ब्रह्मन् वर्तये वृत्तिमुत्तमाम्।
प्रीणामि च यथाशक्ति तच्च त्वं नावबुध्यसे॥ १२॥
अनुवाद
हे ब्राह्मण! मैं अपनी शक्ति के अनुसार तुम्हारे लिए उत्तम जीविका का प्रबन्ध करता रहता हूँ और तुम्हें प्रसन्न रखने का प्रयत्न करता रहता हूँ; परन्तु तुम्हें ये सब बातें स्मरण नहीं रहतीं॥ 12॥
O Brahmin! I keep arranging for the best livelihood for you as per my capability and keep trying to keep you happy to the best of my ability; but you do not remember all these things.॥ 12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥