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श्री महाभारत
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पर्व 7: द्रोण पर्व
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अध्याय 94: दुर्योधनका उपालम्भ सुनकर द्रोणाचार्यका उसके शरीरमें दिव्य कवच बाँधकर उसीको अर्जुनके साथ युद्धके लिये भेजना
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श्लोक 11
श्लोक
7.94.11
जानामि त्वां महाभाग पाण्डवानां हिते रतम्।
तथा मुह्यामि च ब्रह्मन् कार्यवत्तां विचिन्तयन्॥ ११॥
अनुवाद
हे ब्रह्मन्! हे महात्मन! मैं जानता हूँ कि आप पाण्डवों का हित करने में सदैव तत्पर रहते हैं; इसीलिए मैं अपने कार्य की गंभीरता से मोहित हूँ॥11॥
Brahman! O great one! I know that you are always ready to do good for the Pandavas; that is why I am fascinated by the gravity of my task. ॥ 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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