श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 94: दुर्योधनका उपालम्भ सुनकर द्रोणाचार्यका उसके शरीरमें दिव्य कवच बाँधकर उसीको अर्जुनके साथ युद्धके लिये भेजना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.94.10 
योऽसौ पार्थो व्यतिक्रान्तो मिषतस्ते महाद्युते।
सर्वं ह्यद्यातुरं मन्ये नेदमस्ति बलं मम॥ १०॥
 
 
अनुवाद
परन्तु हे वीर! तुम्हारे सामने ही कुन्तीपुत्र अर्जुन तुम्हें लांघकर युद्ध-दल में आ गया। इस कारण मैं अपनी समस्त सेना को व्याकुल और नष्ट हुआ हुआ समझता हूँ। अब मेरी यह सेना नष्ट हो जाएगी॥10॥
 
But, you mighty warrior! In front of you, Kunti's son Arjuna crossed you and entered the battle formation. Because of this, I consider my entire army to be distraught and destroyed. Now, this army of mine will cease to exist.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)