श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 91: अर्जुन और द्रोणाचार्यका वार्तालाप तथा युद्ध एवं द्रोणाचार्यको छोड़कर आगे बढ़े हुए अर्जुनका कौरव-सैनिकोंद्वारा प्रतिरोध  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  7.91.8 
एतावदुक्त्वा तं द्रोण: शरव्रातैरवाकिरत्।
सरथाश्वध्वजं तीक्ष्णै: प्रहसन् वै ससारथिम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन से ऐसा कहकर द्रोणाचार्य ने मुस्कुराते हुए उसके रथ, घोड़ों, ध्वजाओं और सारथि सहित उस पर तीखे बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी।
 
Having said just this to Arjuna, Dronacharya smilingly began showering showers of sharp arrows upon him along with his chariot, horses, flags and charioteer.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas