श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 91: अर्जुन और द्रोणाचार्यका वार्तालाप तथा युद्ध एवं द्रोणाचार्यको छोड़कर आगे बढ़े हुए अर्जुनका कौरव-सैनिकोंद्वारा प्रतिरोध  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  7.91.29 
तद् दृष्ट्वा तादृशं युद्धं द्रोणपाण्डवयोस्तदा।
वासुदेवो महाबुद्धि: कार्यवत्तामचिन्तयत्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
उस समय द्रोणाचार्य और अर्जुन का ऐसा युद्ध देखकर परम बुद्धिमान वसुदेवनन्दन श्रीकृष्ण ने मन में अपने कर्तव्य का निश्चय किया॥29॥
 
At that time, seeing such a fight between Dronacharya and Arjuna, the most intelligent Vasudevanandan Shri Krishna decided in his mind to do his duty. 29॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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