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mahabharat 7.91.23: तत्पश्चात् द्रोणाचार्य ने अर्जुन की छाती पर धनुष-बाण से प्रहार किया, जिससे शत्रुओं के प्राण चले जाते हैं।   |   mahabharat अध्याय 7.91: अर्जुन और द्रोणाचार्यका वार्तालाप तथा युद्ध एवं द्रोणाचार्यको छोड़कर आगे बढ़े हुए अर्जुनका कौरव-सैनिकोंद्वारा प्रतिरोध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 91: अर्जुन और द्रोणाचार्यका वार्तालाप तथा युद्ध एवं द्रोणाचार्यको छोड़कर आगे बढ़े हुए अर्जुनका कौरव-सैनिकोंद्वारा प्रतिरोध  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  7.91.23 
अथात्यर्थं विसृष्टेन द्विषतामसुभोजिना।
आजघ्ने वक्षसि द्रोणो नाराचेन धनंजयम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् द्रोणाचार्य ने अर्जुन की छाती पर धनुष-बाण से प्रहार किया, जिससे शत्रुओं के प्राण चले जाते हैं।
 
Thereafter, Dronacharya struck Arjuna in the chest with a bow and arrow, which takes the life of the enemies.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)