श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 91: अर्जुन और द्रोणाचार्यका वार्तालाप तथा युद्ध एवं द्रोणाचार्यको छोड़कर आगे बढ़े हुए अर्जुनका कौरव-सैनिकोंद्वारा प्रतिरोध  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  7.91.22 
तं पाण्डवादित्यशरांशुजालं
कुरुप्रवीरान् युधि निष्टपन्तम्।
स द्रोणमेघ: शरवृष्टिवेगै:
प्राच्छादयन्मेघ इवार्करश्मीन्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार बादल सूर्य की किरणों को छिपा लेता है, उसी प्रकार द्रोणाचार्य रूपी बादल ने अपने बाणों की वर्षा के बल से युद्ध में प्रधान कौरव योद्धाओं को त्रास देने वाले अर्जुन रूपी सूर्य की बाण-किरणों को ढक दिया।
 
Just as a cloud hides the rays of the Sun, similarly the cloud in the form of Dronacharya, with the force of its shower of arrows, covered the arrow-rays of the Sun in the form of Arjuna, who was tormenting the main Kaurava warriors in the war.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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