श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 91: अर्जुन और द्रोणाचार्यका वार्तालाप तथा युद्ध एवं द्रोणाचार्यको छोड़कर आगे बढ़े हुए अर्जुनका कौरव-सैनिकोंद्वारा प्रतिरोध  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.91.1 
संजय उवाच
दु:शासनबलं हत्वा सव्यसाची महारथ:।
सिन्धुराजं परीप्सन् वै द्रोणानीकमुपाद्रवत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं- राजन! दु:शासन की सेना का संहार करके बुद्धिमान योद्धा अर्जुन ने सिंधुराज जयद्रथ को पाने की इच्छा से द्रोणाचार्य की सेना पर आक्रमण किया॥1॥
 
Sanjay says- Rajan! After killing the army of Dushasana, Arjuna, the wise warrior, attacked Dronacharya's army with the desire to get Sindhuraj Jayadratha. 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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