श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 90: अर्जुनके बाणोंसे हताहत होकर सेनासहित दु:शासनका पलायन  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  7.90.26 
न संदधन् न चाकर्षन् न विमुञ्चन् न चोद्वहन्।
मण्डलेनैव धनुषा नृत्यन् पार्थ: स्म दृश्यते॥ २६॥
 
 
अनुवाद
उस समय अर्जुन धनुष लेकर नृत्य करते हुए सर्वत्र दिखाई दे रहे थे। कोई यह नहीं देख सकता था कि वे कब धनुष पर बाण चढ़ाते हैं, कब प्रत्यंचा खींचते हैं, कब बाण छोड़ते हैं और कब बाण तरकस से निकाल लेते हैं॥ 26॥
 
At that time Arjuna was seen dancing everywhere with a circular bow. No one could see when he would place the arrows on the bow, when he would pull the string, when he would release the arrows and when he would take them out of the quiver.॥ 26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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