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mahabharat 7.9.43-44h: संजय! जब कोई व्यक्ति बड़ी कठिनाई में हो, तो सबसे अच्छा काम यही है कि वह अपनी पूरी क्षमता से वीरता दिखाए; यह बात द्रोणाचार्य में अच्छी तरह स्थापित थी।   |   mahabharat अध्याय 7.9: द्रोणाचार्यकी मृत्युका समाचार सुनकर धृतराष्ट्रका शोक करना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 9: द्रोणाचार्यकी मृत्युका समाचार सुनकर धृतराष्ट्रका शोक करना  »  श्लोक 43-44h
 
 
श्लोक  7.9.43-44h 
एतदार्येण कर्तव्यं कृच्छ्रास्वापत्सु संजय॥ ४३॥
पराक्रमेद् यथाशक्त्या तच्च तस्मिन् प्रतिष्ठितम्।
 
 
अनुवाद
संजय! जब कोई व्यक्ति बड़ी कठिनाई में हो, तो सबसे अच्छा काम यही है कि वह अपनी पूरी क्षमता से वीरता दिखाए; यह बात द्रोणाचार्य में अच्छी तरह स्थापित थी।
 
Sanjay! When a person is in a great difficulty, the best thing to do is to display his valour to the best of his ability; this was well established in Dronacharya. 43 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)