vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 9: द्रोणाचार्यकी मृत्युका समाचार सुनकर धृतराष्ट्रका शोक करना
»
श्लोक 36-37h
श्लोक
7.9.36-37h
अदीनं पुरुषव्याघ्रं ह्रीमन्तमपराजितम्॥ ३६॥
नाहं मृष्ये हतं द्रोणं सिंहद्विरदविक्रमम्।
अनुवाद
मैं उस सिंह द्रोण का वध सहन नहीं कर सकता जो सिंह और हाथी के समान पराक्रमी, उदार, विनीत और किसी से भी अपराजित नहीं था ॥36 1/2॥
I cannot bear the killing of Drona, the lion who was as valiant as a lion and an elephant, generous, modest and undefeated by anyone. ॥ 36 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×