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mahabharat 7.9.33-34h: जैसे स्वर्ग में इन्द्र ने इस लोक में श्रेष्ठ महाबली द्रोणाचार्य को मारा था, उसी प्रकार कुन्ती के पुत्रों ने भी उसी प्रकार मार डाला, जैसे छोटी-छोटी मछलियों ने मिलकर तिमि नामक महान मछली को मार डाला था। यह कैसे संभव हुआ? 33 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.9: द्रोणाचार्यकी मृत्युका समाचार सुनकर धृतराष्ट्रका शोक करना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 9: द्रोणाचार्यकी मृत्युका समाचार सुनकर धृतराष्ट्रका शोक करना  »  श्लोक 33-34h
 
 
श्लोक  7.9.33-34h 
दिवि शक्र इव श्रेष्ठो महासत्त्वो महाबल:॥ ३३॥
स कथं निहत: पार्थै: क्षुद्रमत्स्यैर्यथा तिमि:।
 
 
अनुवाद
जैसे स्वर्ग में इन्द्र ने इस लोक में श्रेष्ठ महाबली द्रोणाचार्य को मारा था, उसी प्रकार कुन्ती के पुत्रों ने भी उसी प्रकार मार डाला, जैसे छोटी-छोटी मछलियों ने मिलकर तिमि नामक महान मछली को मार डाला था। यह कैसे संभव हुआ? 33 1/2॥
 
Kunti's sons killed that great and powerful Dronacharya, who was supreme in this world, like Indra in heaven, in the same way as small fishes together killed the great fish named Timi. How was this possible? 33 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)