Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.9.31-32h: मैंने द्वेषवश कुन्ती के उन पुत्रों को, जो कष्ट सहने के योग्य नहीं थे, सदैव दुःख पहुँचाया है; किन्तु द्रोणाचार्य ने मेरे इस व्यवहार को चुपचाप सहन कर लिया था। उन्हें अपने कर्मों का फल इस हत्या के रूप में मिला है ॥31 1/2॥ | mahabharat अध्याय 7.9: द्रोणाचार्यकी मृत्युका समाचार सुनकर धृतराष्ट्रका शोक करना । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मैंने द्वेषवश कुन्ती के उन पुत्रों को, जो कष्ट सहने के योग्य नहीं थे, सदैव दुःख पहुँचाया है; किन्तु द्रोणाचार्य ने मेरे इस व्यवहार को चुपचाप सहन कर लिया था। उन्हें अपने कर्मों का फल इस हत्या के रूप में मिला है ॥31 1/2॥
I, out of resentment, have always caused pain to Kunti's sons who were not fit to suffer; but Dronacharya had tolerated my behaviour silently. He has received the result of his actions in the form of this murder. ॥ 31 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥