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mahabharat 7.89.22: पाण्डुपुत्र अर्जुन बहुत सावधान रहते थे और जीतने का प्रयत्न करते हुए शीघ्रता से बाण चलाते थे। उस समय उनकी चपलता देखकर अन्य लोगों को बड़ा आश्चर्य होता था।   |   mahabharat अध्याय 7.89: अर्जुनके द्वारा दुर्मर्षणकी गजसेनाका संहार और समस्त सैनिकोंका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 89: अर्जुनके द्वारा दुर्मर्षणकी गजसेनाका संहार और समस्त सैनिकोंका पलायन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  7.89.22 
यत्तस्य घटमानस्य क्षिप्रं विक्षिपत: शरान्।
लाघवात् पाण्डुपुत्रस्य व्यस्मयन्त परे जना:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
पाण्डुपुत्र अर्जुन बहुत सावधान रहते थे और जीतने का प्रयत्न करते हुए शीघ्रता से बाण चलाते थे। उस समय उनकी चपलता देखकर अन्य लोगों को बड़ा आश्चर्य होता था।
 
Pandu's son Arjuna used to be very cautious and would try to win and would shoot arrows quickly. Seeing his agility at that time, other people would be very surprised.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)