Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.89.17-19: अर्जुन के उत्तम बाणों से कटे हुए योद्धाओं के घेरे के समान घने और महासर्प के समान दिखने वाले भिन्दिपाल, प्रास, शक्ति, ऋष्टि, फरसा, निर्व्यूह, तलवार, धनुष, तोमर, बाण, कवच, आभूषण, गदा और बाजूबंद आदि से सुसज्जित भुजाओं वाले, क्रोध में भरे हुए, ऊपर की ओर उछलते, छटपटाते और नाना प्रकार की हलचल करते हुए अपना महान वेग प्रदर्शित कर रहे थे ॥17-19॥ | mahabharat अध्याय 7.89: अर्जुनके द्वारा दुर्मर्षणकी गजसेनाका संहार और समस्त सैनिकोंका पलायन । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अर्जुन के उत्तम बाणों से कटे हुए योद्धाओं के घेरे के समान घने और महासर्प के समान दिखने वाले भिन्दिपाल, प्रास, शक्ति, ऋष्टि, फरसा, निर्व्यूह, तलवार, धनुष, तोमर, बाण, कवच, आभूषण, गदा और बाजूबंद आदि से सुसज्जित भुजाओं वाले, क्रोध में भरे हुए, ऊपर की ओर उछलते, छटपटाते और नाना प्रकार की हलचल करते हुए अपना महान वेग प्रदर्शित कर रहे थे ॥17-19॥
Bhindipal, thick as the circumambulation of the warriors cut by Arjuna's best arrows and looking like a great serpent, with arms equipped with prasa, shakti, rishti, axe, nirvyuh, sword, bow, tomar, arrows, armour, jewellery, mace and armbands etc., were filled with rage and displayed their great speed, jumping upwards, writhing and making all kinds of movements. 17-19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥