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श्लोक 7.89.11  |
तत: कबन्धं किंचित् तु धनुरालम्ब्य तिष्ठति।
किंचित् खड्गं विनिष्कृष्य भुजेनोद्यम्य तिष्ठति॥ ११॥ |
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| अनुवाद |
| कोई हाथ में धनुष लिए खड़े थे और कोई हाथ में नंगी तलवारें लिए खड़े थे ॥11॥ |
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| Some stood with bows in their hands and some stood with drawn swords in their hands. ॥11॥ |
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