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श्लोक  7.88.d1 
(लोकक्षये महाराज यादृशास्तादृशा हि ते।
अशिवा धार्तराष्ट्राणां शिवा: पार्थस्य संयुगे॥)
 
 
अनुवाद
महाराज! उस प्रजा का नाश करने वाले युद्ध में कुछ ऐसे शकुन प्रकट होने लगे जो आपके पुत्रों के लिए अशुभ और अर्जुन के लिए शुभ थे।
 
Maharaj! In that war which was destroying the people, some omens started appearing which were inauspicious for your sons and auspicious for Arjun.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)