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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 88: कौरव-सेनाके लिये अपशकुन, दुर्मर्षणका अर्जुनसे लड़नेका उत्साह तथा अर्जुनका रणभूमिमें प्रवेश एवं शंखनाद  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.88.5 
मृगाश्च घोरसंनादा: शिवाश्चाशिवदर्शना:।
दक्षिणेन प्रयातानामस्माकं प्राणदंस्तथा॥ ५॥
 
 
अनुवाद
और जैसे ही हम आगे बढ़ने लगे, भयानक आवाजें निकालने वाले जानवर और अशुभ दृष्टि वाले सियार हमारे दाहिनी ओर आ गए और शोर मचाने लगे।
 
And as we began to move forward, animals making terrifying sounds and jackals with ominous looks came to our right and started making a noise. 5.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)